कन्हैया के पिता की मौत हो चुकी है। मां बीमार हैं। बड़ा भाई ऑटो चलाता था लेकिन लॉकडाउन ने रोजी-रोटी छीन ली। परिवार एक कमरे के घर में रहता है। आर्थिक हालत खराब होने की वजह से 3 हजार रुपये किराया भी नहीं चुका पा रहे हैं। अब घर का खर्चा चलाने के लिए कन्हैया ठेले पर फल बेचता है। उसकी पढ़ाई छूट गई है।
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